दुष्कर्म मामले में यूट्यूबर Mani Meraj को जमानत, शादी की शर्त पर हाईकोर्ट से राहत

प्रयागराज/गाजियाबाद: दुष्कर्म मामले में यूट्यूबर Mani Meraj को जमानत , Allahabad High Court ने उन्हें सशर्त जमानत प्रदान की है। अदालत ने यह फैसला उस समय सुनाया जब शिकायतकर्ता की ओर से समझौते की जानकारी दी गई और दोनों पक्षों ने विशेष विवाह अधिनियम के तहत शादी करने पर सहमति जताई।

दुष्कर्म मामले में यूट्यूबर मनी मेराज को जमानत
दुष्कर्म मामले में यूट्यूबर मनी मेराज को जमानत

क्या है मामला?

Mani Meraj के खिलाफ Ghaziabad में एक युवती ने एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोप था कि आरोपी ने शादी का वादा कर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए और बाद में वादे से मुकर गया। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि युवती के साथ मारपीट की गई, अप्राकृतिक कृत्य किया गया और जबरन गर्भपात कराया गया। इन गंभीर आरोपों के आधार पर पुलिस ने अक्टूबर 2025 में Mani Meraj को गिरफ्तार कर लिया था। तब से वह न्यायिक हिरासत में थे।

अदालत में सुनवाई के दौरान क्या हुआ?

अदालत में जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान पीड़िता की ओर से एक हस्तलिखित बयान प्रस्तुत किया गया। इस बयान में कहा गया कि दोनों पक्षों के बीच अब समझौता हो गया है और वे आपसी सहमति से विवाह करना चाहते हैं। पीड़िता की ओर से जमानत का विरोध नहीं किया गया। हालांकि, राज्य सरकार की ओर से पेश अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध किया और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए राहत न देने की मांग की। इसके बावजूद अदालत ने उपलब्ध तथ्यों, समझौते हुए और पीड़िता की सहमति को ध्यान में रखते हुए सशर्त जमानत मंजूर कर ली है और अब जल्द ही Mani Meraj जेल से बहार आएंगे ।

दुष्कर्म मामले में यूट्यूबर मनी मेराज को जमानत
दुष्कर्म मामले में यूट्यूबर मनी मेराज को जमानत

जाने जमानत की शर्तें क्या हैं?

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि आरोपी को रिहाई के बाद निर्धारित समय सीमा के भीतर विवाह की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। और आदेश में यह भी कहा गया है कि यदि तय अवधि में विवाह नहीं होता है, तो शिकायतकर्ता को जमानत रद्द कराने के लिए संबंधित अदालत में आवेदन करने की स्वतंत्रता होगी। और अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह जमानत आदेश मामले के अंतिम निर्णय को प्रभावित नहीं करेगा। ट्रायल कोर्ट में साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर ही अंतिम फैसला लिया जाएगा।

इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। कुछ लोग इसे दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति का मामला बता रहे हैं, जबकि कई लोगों ने गंभीर आरोपों वाले मामलों में शादी की शर्त पर जमानत दिए जाने पर सवाल उठाए हैं। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि जमानत देना अदालत का विवेकाधिकार है और यह दोष सिद्ध होने या न होने का प्रमाण नहीं होता।

फिलहाल, हाईकोर्ट के आदेश के बाद Mani Meraj की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि क्या दोनों पक्ष तय समय के भीतर विवाह की औपचारिकताएं पूरी करते हैं या नहीं। यदि शर्तों का पालन नहीं किया गया तो जमानत रद्द हो सकती है और Mani Meraj को दोबारा हिरासत में लिया जा सकता है।और अब Mani Meraj के जितने भी दरसक है उनकी नजर इस बात पर है, की क्या Mani Meraj शादी करते है।

यह मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है और अंतिम फैसला ट्रायल कोर्ट में साक्ष्यों के आधार पर होगा। तब तक यह प्रकरण कानूनी, सामाजिक और नैतिक दृष्टि से चर्चा का विषय बना रहेगा।

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