Union Budget 2026: सोलर सेक्टर को बड़ी राहत, कच्चे माल पर टैक्स खत्म
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने Union Budget 2026 पेश करते हुए नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र, खासकर सोलर सेक्टर के लिए कई अहम घोषणाएँ कीं। बजट में सोलर पैनल निर्माण से जुड़े एक प्रमुख कच्चे माल पर लगने वाले टैक्स को पूरी तरह समाप्त करने का ऐलान किया गया है।
सरकार के इस फैसले को घरेलू सोलर विनिर्माण को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। टैक्स हटने से देश में सोलर पैनल बनाने की लागत कम होगी, जिससे ‘मेक इन इंडिया’ को मजबूती मिलेगी और आयात पर निर्भरता घटेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय का सीधा फायदा आम उपभोक्ताओं को भी मिलेगा। उत्पादन लागत कम होने के कारण सोलर पैनलों की कीमतों में गिरावट आ सकती है, जिससे घरों और उद्योगों में सोलर एनर्जी को अपनाना और आसान होगा।
बजट 2026 के ये प्रावधान भारत के रिन्यूएबल एनर्जी लक्ष्यों को हासिल करने में मददगार साबित हो सकते हैं और सोलर सेक्टर को नई गति देने का काम करेंगे।
Union Budget 2026: सोलर पैनल निर्माण को बढ़ावा, टैक्स छूट से सस्ती होगी सोलर एनर्जी
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए Union Budget 2026 में नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र, खासकर सोलर सेक्टर के लिए बड़ा ऐलान किया गया है। बजट में सोलर पैनल निर्माण से जुड़े एक महत्वपूर्ण कच्चे माल पर लगने वाले टैक्स को पूरी तरह समाप्त करने की घोषणा की गई है।
सरकार के इस फैसले को सोलर उद्योग के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। उद्योग जगत ने इस कदम का खुले दिल से स्वागत किया है और इसे भारत को वैश्विक सोलर विनिर्माण केंद्र बनाने की दिशा में एक मजबूत और दूरदर्शी पहल बताया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, टैक्स हटने से घरेलू स्तर पर सोलर पैनल निर्माण की लागत में कमी आएगी। इससे न केवल ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि सोलर उपकरणों के आयात पर निर्भरता भी घटेगी। कंपनियों को प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उत्पादन करने का अवसर मिलेगा, जिससे भारतीय सोलर उद्योग अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी मजबूती से उभर सकता है।
इस फैसले का सीधा फायदा आम लोगों को भी मिलेगा। उत्पादन लागत कम होने से सोलर पैनलों की कीमतों में गिरावट आने की उम्मीद है। इससे घरों, किसानों और छोटे उद्योगों के लिए सोलर एनर्जी अपनाना और सस्ता व आसान हो जाएगा, जिससे बिजली बिलों में कमी आएगी।
इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे कि बजट में किया गया यह बदलाव क्या है, सोलर सेक्टर पर इसका क्या असर पड़ेगा और आम उपभोक्ताओं को इससे किस तरह का लाभ मिल सकता है।
सोडियम एंटीमोनैट पर टैक्स पूरी तरह खत्म
Union Budget 2026 में सोलर पैनल सेक्टर से जुड़ा सबसे बड़ा और अहम फैसला सोडियम एंटीमोनैट पर बेसिक कस्टम ड्यूटी को लेकर किया गया है। सरकार ने इस कच्चे माल पर लगने वाली 7.5 प्रतिशत बेसिक कस्टम ड्यूटी को घटाकर शून्य कर दिया है।
सोडियम एंटीमोनैट एक महत्वपूर्ण रसायन है, जिसका इस्तेमाल फोटोवोल्टिक सोलर ग्लास के निर्माण में किया जाता है। सोलर ग्लास, सोलर पैनल का अनिवार्य हिस्सा होता है और यही पैनल की पारदर्शिता, मजबूती और सूर्य के प्रकाश को अवशोषित करने की क्षमता को तय करता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस कच्चे माल पर टैक्स हटने से भारतीय सोलर निर्माताओं को बड़ी राहत मिलेगी। आयात लागत कम होने से उत्पादन खर्च में उल्लेखनीय कमी आएगी, जिससे घरेलू स्तर पर सोलर पैनल निर्माण अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेगा। इसका असर आगे चलकर सोलर पैनलों की कीमतों में कमी के रूप में भी देखने को मिल सकता है।
सोलर पैनल की कीमतों में क्यों आएगी गिरावट?
उद्योग विशेषज्ञों के मुताबिक, सोलर ग्लास पूरे सोलर मॉड्यूल की कुल लागत का लगभग 8 से 12 प्रतिशत हिस्सा होता है। ऐसे में जब इस महत्वपूर्ण घटक की लागत कम होगी, तो इसका सीधा असर पूरे सोलर पैनल की कीमत पर पड़ेगा। टैक्स हटने के बाद सोलर ग्लास का उत्पादन सस्ता होगा, जिससे सोलर मॉड्यूल की कुल लागत में भी कमी आने की उम्मीद है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में साफ तौर पर कहा कि इस फैसले का उद्देश्य घरेलू मूल्य संवर्धन (डोमेस्टिक वैल्यू एडिशन) को बढ़ावा देना, सोलर मॉड्यूल की कीमतों को कम करना और भारत में सोलर विनिर्माण क्षमता को तेज़ी से बढ़ाना है।
Union Budget 2026 में सोलर पैनल से जुड़े इस प्रावधान के जरिए सरकार भारतीय कंपनियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने पर जोर दे रही है। लागत में कमी आने से भारतीय सोलर उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेहतर कीमत पर उपलब्ध हो सकेंगे, जिससे निर्यात बढ़ने और देश को वैश्विक सोलर मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में मदद मिलने की उम्मीद है।
घरेलू विनिर्माण को मिलेगी बड़ी ताकत
सोडियम एंटीमोनैट पर टैक्स में की गई यह कटौती सरकार की आत्मनिर्भर भारत पहल के अनुरूप मानी जा रही है। जब इस कच्चे माल का आयात सस्ता होगा, तो घरेलू सोलर ग्लास निर्माता अपने उत्पादन को बढ़ाने में सक्षम होंगे। मौजूदा समय में भारत सोलर ग्लास की जरूरतों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है, खासकर चीन से।
विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे माल की लागत कम होने से देश में नई सोलर ग्लास और सोलर पैनल विनिर्माण इकाइयों की स्थापना को बढ़ावा मिलेगा। इससे न केवल घरेलू उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। इसके साथ ही सोलर सेक्टर में आयात कम होने से विदेशी मुद्रा की बचत होने की भी संभावना है।
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने भी इस फैसले की सराहना करते हुए कहा है कि यह कदम घरेलू सोलर विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करेगा। सरकार का लक्ष्य भारत को एक वैश्विक सोलर विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करना है।
Union Budget 2026 में सोलर पैनल से जुड़ा यह प्रावधान इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। देश में जब उच्च गुणवत्ता वाले और प्रतिस्पर्धी कीमतों पर सोलर पैनल तैयार होंगे, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय उत्पादों की मांग भी तेज़ी से बढ़ेगी।
आम उपभोक्ताओं को मिलेगा सीधा लाभ
Union Budget 2026 में सोलर पैनल से जुड़े किए गए इन बदलावों का सबसे बड़ा फायदा आम उपभोक्ताओं को मिलने की उम्मीद है। जब विनिर्माताओं की उत्पादन लागत कम होगी, तो वे सोलर पैनल और उससे जुड़े उपकरण कम कीमत पर बाजार में उतार सकेंगे। मौजूदा समय में एक सामान्य घरेलू सोलर पैनल सिस्टम लगाने में काफी खर्च आता है, लेकिन बजट के इस फैसले के बाद यह लागत घटने की संभावना जताई जा रही है।
उद्योग विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगले 6 से 12 महीनों के भीतर सोलर पैनल की कीमतों में लगभग 5 से 10 प्रतिशत तक की गिरावट देखी जा सकती है। इससे उन लोगों को सीधा लाभ मिलेगा जो अपने घरों की छत पर रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने की योजना बना रहे हैं।
कम कीमतों का मतलब यह भी है कि सोलर सिस्टम में शुरुआती निवेश घटेगा और उपभोक्ता अपेक्षाकृत कम समय में अपने बिजली बिलों में बचत महसूस कर सकेंगे। किसानों के लिए भी यह फैसला राहत भरा माना जा रहा है, क्योंकि सोलर पंप की कीमतों में कमी आने से सिंचाई की लागत घटेगी।
कुल मिलाकर, Union Budget 2026 में सोलर पैनल से जुड़े ये प्रावधान देशभर में स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
नवीकरणीय ऊर्जा बजट में 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी
Union Budget 2026 में सरकार ने केवल टैक्स में राहत ही नहीं दी है, बल्कि नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के लिए बजटीय आवंटन में भी बड़ा इजाफा किया है। इस वर्ष रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर का कुल बजट 30 प्रतिशत बढ़ाकर 32,914.7 करोड़ रुपये कर दिया गया है। पिछले वित्त वर्ष की तुलना में यह बढ़ोतरी साफ संकेत देती है कि सरकार स्वच्छ ऊर्जा को लेकर गंभीर और दीर्घकालिक रणनीति पर काम कर रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, Union Budget 2026 में सोलर पैनल और नवीकरणीय ऊर्जा पर दिया गया यह विशेष जोर भारत के जलवायु लक्ष्यों और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने की दिशा में अहम भूमिका निभाएगा। बढ़ा हुआ बजट देश में स्वच्छ ऊर्जा अवसंरचना को तेज़ी से विकसित करने में मदद करेगा।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस अतिरिक्त आवंटन का उपयोग केवल नई सोलर परियोजनाओं तक सीमित नहीं रहेगा। इसका एक बड़ा हिस्सा ग्रिड एकीकरण, ऊर्जा भंडारण (एनर्जी स्टोरेज) और घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने पर भी खर्च किया जाएगा। नीति निर्माताओं का मानना है कि मजबूत सप्लाई चेन के बिना सोलर सेक्टर में तेज़ और टिकाऊ विकास संभव नहीं है।
इसी कारण बजट में बैटरी स्टोरेज, इन्वर्टर और अन्य सहायक उपकरणों के घरेलू विनिर्माण को भी बढ़ावा देने पर खास ध्यान दिया गया है, ताकि भारत नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सके।
पीएम सूर्य घर योजना को मिला बड़ा बूस्ट
Union Budget 2026 में सोलर सेक्टर को मजबूती देने के लिए सरकार ने पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत बड़ा ऐलान किया है। बजट में इस योजना के लिए 22,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, जिसे सोलर एनर्जी को घर-घर तक पहुंचाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
इस योजना का लक्ष्य मार्च 2026 तक 40 लाख घरों और वर्ष 2027 तक एक करोड़ घरों तक सोलर बिजली पहुंचाना है। सरकार इसके तहत रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने पर 40 प्रतिशत तक की सब्सिडी प्रदान कर रही है, जिससे आम परिवारों के लिए सोलर सिस्टम लगवाना काफी किफायती हो जाता है। इस सब्सिडी के कारण घरेलू बिजली बिल में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस योजना से न केवल उपभोक्ताओं को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत होगी। जब लाखों घर अपनी बिजली खुद उत्पन्न करेंगे, तो पारंपरिक बिजली ग्रिड पर दबाव कम होगा और बिजली आपूर्ति अधिक स्थिर बनेगी।
सरकार का अनुमान है कि पीएम सूर्य घर योजना के जरिए सालाना लगभग 75,000 करोड़ रुपये की बचत संभव होगी। Union Budget 2026 में सोलर पैनल से जुड़ी इस पहल के माध्यम से भारत वर्ष 2030 तक 500 गीगावॉट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य के और करीब पहुंच सकेगा।
बजट से पहले और बाद की तुलना
Union Budget 2026 में किए गए प्रावधानों के असर को समझने के लिए बजट से पहले और बाद की स्थिति की तुलना अहम है। नीचे दी गई तालिका से साफ पता चलता है कि सोलर पैनल और नवीकरणीय ऊर्जा सेक्टर में सरकार के फैसलों से किस तरह व्यापक बदलाव आने की संभावना है:
| मापदंड | बजट से पहले | बजट के बाद | प्रभाव |
| सोडियम एंटीमोनैट पर कस्टम ड्यूटी | 7.5% | 0% | विनिर्माण लागत में कमी |
| सोलर ग्लास की अनुमानित कीमत | अधिक | कम (5–8% तक) | सोलर पैनल सस्ते होंगे |
| नवीकरणीय ऊर्जा बजट | लगभग 25,000 करोड़ रुपये | 32,914.7 करोड़ रुपये | 30% की वृद्धि |
| पीएम सूर्य घर योजना का आवंटन | सीमित | 22,000 करोड़ रुपये | अधिक सब्सिडी उपलब्ध |
| घरेलू विनिर्माण क्षमता | सीमित | बढ़ने की संभावना | आत्मनिर्भरता को बढ़ावा |
| आयात पर निर्भरता | अधिक | कम होने की उम्मीद | विदेशी मुद्रा की बचत |
इस तुलना से स्पष्ट है कि Union Budget 2026 में सोलर पैनल और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र को लेकर किए गए फैसले केवल तात्कालिक राहत तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये दीर्घकालिक रूप से घरेलू विनिर्माण, उपभोक्ताओं और देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने वाले साबित हो सकते हैं।
वैश्विक बाजार में भारत की स्थिति होगी मजबूत
Union Budget 2026 में सोलर पैनल से जुड़े किए गए ये फैसले भारत को वैश्विक सोलर बाजार में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। फिलहाल सोलर पैनल विनिर्माण के क्षेत्र में चीन का दबदबा है, लेकिन भारत तेज़ी से इस दिशा में अपनी क्षमता बढ़ा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, जब भारत में कम लागत पर उच्च गुणवत्ता वाले सोलर पैनल तैयार होने लगेंगे, तो यूरोप, अफ्रीका और अन्य उभरते बाजारों में इनके निर्यात की व्यापक संभावनाएं खुलेंगी। इससे न केवल भारतीय कंपनियों की वैश्विक मौजूदगी मजबूत होगी, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा और विदेशी मुद्रा आय में इजाफा होगा।
दुनियाभर में सोलर ऊर्जा की मांग तेज़ी से बढ़ रही है, क्योंकि अधिकांश देश जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए स्वच्छ ऊर्जा को प्राथमिकता दे रहे हैं। भारत के पास सालभर प्रचुर मात्रा में धूप उपलब्ध है और अब Union Budget 2026 के जरिए सरकार की नीतियां भी सोलर सेक्टर के अनुकूल होती जा रही हैं।
इन सभी कारकों को देखते हुए, आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक सोलर उद्योग में एक महत्वपूर्ण और प्रभावशाली भूमिका निभा सकता है। Union Budget 2026 में सोलर पैनल से जुड़े फैसले इस दिशा में एक मजबूत आधार तैयार करते नजर आ रहे हैं।
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