ईरान का नया खतरनाक हथियार! क्लस्टर बम मिसाइल से इज़रायल पर हमला
ईरान का नया खतरनाक हथियार! क्लस्टर बम मिसाइल से इज़रायल पर हमला,ईरान और इज़रायल के बीच संघर्ष मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच बदतर होता जा रहा है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने पहली बार क्लस्टर बम से बैलिस्टिक मिसाइल से हमला किया है। इस हमले ने युद्ध का रूप बदलने की आशंका बढ़ा दी है और विश्व भर में नए विवाद पैदा कर दिए हैं।
इजरायल के अधिकारियों का कहना है कि ईरान ने क्लस्टर बम से लैस बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जो मौजूदा युद्ध में पहली बार इस्तेमाल की गई हैं। क्लस्टर बम को आज के युद्ध में सबसे विवादित हथियारों में से एक माना जाता है, क्योंकि यह लंबे समय तक खतरा पैदा करता है और एक ही हमले में बड़े क्षेत्रों को निशाना बना सकता है।
क्लस्टर बम कैसे काम करता है
क्लस्टर बम एक हथियार है जो हवा में ही खुलकर सैकड़ों छोटे-छोटे बमों (सबम्यूनिशन) को बड़े क्षेत्र में फैलाता है। इजरायल के सैन्य अधिकारियों ने बताया कि ईरान की मिसाइल जमीन पर गिरने से चार से सात किलोमीटर पहले ही हवा में फट गई। इसके बाद करीब 20 छोटे बम निकले, जो 5 से 8 किलोमीटर की दूरी पर फैल गए।
इनमें से एक सबम्यूनिशन तेल अवीव के दक्षिण में अजोर शहर में एक घर पर गिरा, जिससे इमारत को चोट लगी। इसके बावजूद, इस घटना में कोई घायल नहीं हुआ।

तेल अवीव के पास भी हमला
इज़रायल के अधिकारियों ने बताया कि क्लस्टर वॉरहेड ले जा रही एक बैलिस्टिक मिसाइल तेल अवीव के पास गिरी, जिसके परिणामस्वरूप कम से कम बारह लोग घायल हो गए। अमेरिकी मीडिया के अनुसार 28 फरवरी से अब तक ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल हमलों में इज़रायल में कम से कम 11 लोग मर चुके हैं और करीब 1,000 घायल हो चुके हैं।
ईरान ने हाल ही में अपनी हमलों की रणनीति को भी बदल दिया है। 3 मार्च को ईरान ने 28 फरवरी की तुलना में सिर्फ 6 मिसाइलें इज़रायल की ओर दागीं। इज़रायली सेना कहती है कि क्लस्टर वॉरहेड्स का इस्तेमाल ऑपरेशनल स्तर पर नई चुनौतियों को जन्म दे रहा है।
सेना के विशेषज्ञों का कहना है कि ये हथियार शहरी क्षेत्रों के लिए बहुत खतरनाक हैं क्योंकि मिसाइल एक स्थान पर विस्फोट करने की बजाय हवा में खुलकर कई स्थानों पर छोटे-छोटे विस्फोट करती हैं। नागरिकों का खतरा इससे कई गुना बढ़ जाता है।
रूस और चीन पर सवाल
ईरान के इस हमले के बाद इज़रायल ने सवाल उठाया कि इतनी उन्नत क्षमता कैसे बनाई गई? इजरायल के अधिकारियों ने कहा कि इसमें रूस या चीन से सैन्य तकनीकी सहायता मिल सकती है। इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवादित हथियार
क्लस्टर हथियारों पर लंबे समय से विश्व भर में बहस चलती रही है। 2008 में “कन्वेंशन ऑन क्लस्टर म्यूनिशन्स” नामक एक अंतरराष्ट्रीय समझौता हुआ, जिसका उद्देश्य था इन हथियारों के उत्पादन, उपयोग और भंडारण पर प्रतिबंध लगाना। 100 से अधिक देशों ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं और अब तक 111 देश इसमें शामिल हो चुके हैं।
इसके बावजूद, ईरान और इजरायल इस समझौते में शामिल नहीं हैं। अमेरिका ने भी इस संधि में शामिल होने से इनकार कर दिया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि क्लस्टर बम पहले भी कई युद्धों में इस्तेमाल हुआ है। रूस पर यूक्रेन युद्ध के दौरान ऐसे हथियारों का उपयोग करने का भी आरोप लगा था।
नागरिकों के लिए बढ़ा खतरा
सैन्य विशेषज्ञों ने कहा कि क्लस्टर बम का सबसे बड़ा खतरा यह है कि इसके कई छोटे बम तुरंत नहीं फटते और जमीन पर लंबे समय तक रहते हैं। इससे नागरिकों को युद्ध खत्म होने के बाद भी खतरा रहता है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस तरह के हथियारों का इस्तेमाल मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच चिंतित है। इस तरह के हमले जारी रह सकते हैं, और भी घातक हो सकते हैं।